भोपाल। दीपावली के अवसर पर सोशल मीडिया पर वायरल हुई देसी ‘कार्बाइड गन’ ने मध्य प्रदेश में कहर मचा दिया है। भोपाल, ग्वालियर, विदिशा और इंदौर सहित कई जिलों में 200 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं। इनमें कई की आंखों की रोशनी चली गई, जबकि कुछ के चेहरे और हाथ झुलस गए। इस खतरनाक ट्रेंड ने कई परिवारों की दिवाली की खुशियां मातम में बदल दीं।
सोशल मीडिया बना हादसों का कारण
जानकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दीपावली से पहले इस देसी गन को ‘ग्रीन पटाखा’ और ‘कूल ट्रेंड’ के रूप में प्रचारित किया गया था। पीवीसी पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बनी इस गन को सस्ती कीमत पर बेचा जा रहा था, जिससे यह बच्चों में लोकप्रिय हो गई। लेकिन जुगाड़ से बनी यह गन धमाके के दौरान बेहद खतरनाक साबित हुई और कई लोगों की आंखों व चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।
भोपाल में सबसे ज्यादा घायल
केवल भोपाल में ही 124 लोगों की आंखों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से छह मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता बताई गई है। विदिशा में 25, ग्वालियर में 10 और इंदौर में 6 लोगों की आंखों में गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों के अनुसार, धमाके के बाद पाइप के छोटे-छोटे टुकड़े आंखों और चेहरे में धंस गए, जिससे कई मरीजों की स्थिति गंभीर है।
कैसे काम करती है ‘कार्बाइड गन’
यह गन प्लास्टिक पाइप, गैस लाइटर और कैल्शियम कार्बाइड से बनाई जाती है। पानी डालने पर कार्बाइड से ‘एसिटिलीन गैस’ बनती है, जो आग लगते ही धमाका करती है। इस दौरान प्लास्टिक पाइप के टुकड़े चारों ओर बिखरते हैं, जो शरीर में घुसकर गंभीर चोट पहुंचाते हैं।
प्रशासन ने लगाई रोक
हादसों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने धारा 163 के तहत कार्बाइड गन की बिक्री, खरीद और भंडारण पर तत्काल प्रतिबंध लगाया है। विदिशा में पुलिस ने सात विक्रेताओं को गिरफ्तार कर 228 प्लास्टिक गन और चार किलोग्राम कैल्शियम कार्बाइड जब्त किया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के खतरनाक उपकरणों का प्रयोग न करें और बच्चोंको इससे दूर रखें।




