नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पीएफ खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया पहले से आसान हो जाएगी और दस्तावेजी प्रक्रिया में भी राहत दी गई है। साथ ही, प्रीमैच्योर फाइनल सेटलमेंट की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है, जबकि पेंशन सेटलमेंट की अवधि अब 36 महीने होगी। इन बदलावों का असर नौकरीपेशा लोगों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।
पहला बिंदु: 75 प्रतिशत निकासी अब आसान
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई सीबीटी की 238वीं बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। अब पीएफ खाता धारक अपने खाते में जमा कुल राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा आसानी से निकाल सकेंगे। खाते में न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि रखना अनिवार्य होगा। इससे पहले पूरी राशि केवल बेरोजगारी या सेवानिवृत्ति की स्थिति में ही निकाली जा सकती थी।
दूसरा बिंदु: न्यूनतम बैलेंस पर ब्याज जारी रहेगा
नई व्यवस्था के अनुसार खाते में रखे जाने वाले 25 प्रतिशत न्यूनतम बैलेंस पर 8.25 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहेगा। यह राशि कंपाउंडिंग के आधार पर बढ़ेगी। जरूरत पड़ने पर इस जमा राशि से कर्मचारी को पेंशन फंड का लाभ भी मिल सकेगा।
तीसरा बिंदु: निकासी के लिए कारण बताना नहीं होगा जरूरी
ईपीएफओ ने डॉक्युमेंटेशन प्रक्रिया को सरल बनाते हुए पीएफ निकासी के लिए कारण बताने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब कर्मचारी 75 प्रतिशत तक की निकासी बिना किसी कारण का उल्लेख किए कर सकेंगे। पहले निकासी के लिए फॉर्म में कारण बताना अनिवार्य था। इस फैसले से क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
चौथा बिंदु: फाइनल सेटलमेंट की समय सीमा बढ़ाई गई
ईपीएफओ ने प्रीमैच्योर फाइनल सेटलमेंट की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी है। इसका मतलब है कि नौकरी छोड़ने या जाने के बाद कर्मचारियों को पूरा पीएफ निकालने के लिए अब एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, पेंशन निकासी के लिए यह अवधि अब 36 महीने तय की गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव कर्मचारियों को आंशिक निकासी की सुविधा देते हुए उनके सेवानिवृत्ति फंड की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
पांचवां बिंदु: जरूरत पर निकासी की लिमिट बढ़ाई गई
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी की सीमा में भी ढील दी है। अब शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार तक पीएफ निकाला जा सकेगा। पहले यह सीमा केवल तीन बार तक सीमित थी। साथ ही, आंशिक निकासी के लिए सेवा अवधि की शर्त को एक समान कर 12 महीने कर दिया गया है।
इन संशोधनों से जहां कर्मचारियों को तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी, वहीं फाइनल सेटलमेंट में बढ़ी अवधि से सेवानिवृत्ति बचत पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी।




