भारतीय सेना से हार के बाद जैश-ए-मोहम्मद की नई चाल, अब महिलाओं की भर्ती शुरू

नई दिल्ली। भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में भारी नुकसान उठाने के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब यह संगठन युवाओं के साथ-साथ महिलाओं को भी आतंकी गतिविधियों में शामिल करने लगा है। पहली बार जैश ने महिलाओं के लिए एक अलग यूनिट बनाई है, जिसका नाम “जमात-उल-मोमिनात” रखा गया है।

8 अक्टूबर से पाकिस्तान में भर्ती शुरू
मौलाना मसूद अजहर के नाम पर जारी एक पत्र के जरिए इस यूनिट की घोषणा की गई। बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया 8 अक्टूबर से बहावलपुर स्थित मरकज़ उस्मान-ओ-अली से शुरू हो चुकी है। अजहर की बहन सादिया अजहर इस महिला ब्रिगेड की कमांडर होगी। सादिया के पति यूसुफ अजहर की मौत 7 मई को भारतीय सेना की कार्रवाई के दौरान हुई थी।

कमांडरों की पत्नियां और गरीब महिलाएं शामिल
संगठन अब अपने कमांडरों की पत्नियों और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इस यूनिट में जोड़ रहा है। इन्हें बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मानसेहरा जैसे शहरों के मदरसों से भर्ती किया जा रहा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल-सैफ ने मिलकर महिलाओं को सशस्त्र मिशनों में शामिल करने की मंजूरी दी है, जो जैश की नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव है।

भारत के कई राज्यों में सक्रिय नेटवर्क
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह महिला ब्रिगेड ऑनलाइन माध्यम से भारत के जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिणी राज्यों में सक्रिय हो रही है। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और मदरसों के जरिए यह नेटवर्क युवतियों को धार्मिक भावनाओं के नाम पर ब्रेनवॉश कर उन्हें संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि भविष्य में इनका इस्तेमाल सुसाइड मिशनों में भी किया जा सकता है।

सेल बेस्ड स्ट्रक्चर पर काम करती नई ब्रिगेड
इस संगठन का एक सर्कुलर भी सामने आया है, जिसमें मक्का-मदीना की तस्वीरें और कुरान की आयतें लगाई गई हैं ताकि इसे धार्मिक स्वरूप दिया जा सके। यह ब्रिगेड भी जैश की तरह छोटे-छोटे ग्रुप्स में काम करती है, जो आपस में डिजिटल माध्यमों से जुड़े रहते हैं और फंड जुटाने का काम भी करते हैं।

यह कदम इस बात का संकेत है कि जैश-ए-मोहम्मद अब महिलाओं को आतंक के नए हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहा है।

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