पत्रकारिता का मतलब मोबाइल लेकर चलना नहीं, खबर की जांच कर समाज तक पहुंचाना है- बसंत अग्रवाल

पत्रकारिता का मतलब मोबाइल लेकर चलना नहीं, खबर की जांच कर समाज तक पहुंचाना है- बसंत अग्रवाल

रायपुर। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा बिना तथ्यात्मक जांच के प्रसारित की जा रही खबरों पर समाजसेवक बसंत अग्रवाल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि पत्रकारिता का अर्थ केवल मोबाइल हाथ में लेकर अपुष्ट और भ्रामक खबरें चलाना नहीं है, बल्कि सच्चा पत्रकार वही होता है जो खबर की पूरी जांच-पड़ताल कर उसकी जड़ तक पहुंचने के बाद ही उसे समाज के सामने रखता है।

उन्होंने कहा कि, समाज पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानता है और पत्रकारिता को समाज का आइना समझता है। ऐसे में व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने या निजी स्वार्थ के लिए पत्रकारिता का दुरुपयोग करना घातक प्रवृत्ति है। जिन लोगों ने उनके खिलाफ बिना तथ्यों के खबरें चलाई हैं और जिन किसानों ने बिना पूरी जानकारी के आरोप लगाए हैं, उन सभी को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा जाएगा।

समाजसेवक बसंत अग्रवाल ने कहा कि देश की सिविल अदालतों में एक लाख नहीं बल्कि करोड़ों जमीन विवाद के मामले लंबित हैं। यदि किसी का नाम किसी मामले में आए तो सीधे भागने या दोषी ठहराने की बजाय पहले तथ्यों को समझा जाना चाहिए। यदि हर केस को तथ्यात्मक ढंग से उजागर किया जाए तो लोगों को जल्द न्याय मिल सकता है।

उन्होंने संगवारी ढाबे के संचालक पप्पू बंजारे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, वह कांग्रेस के लिए वसूली का काम करता था और संबंधित जमीन पर अवैध कब्जा कर बैठा है। आरोप है कि उसने उनसे चार लाख रुपये की मांग की है। इस मामले में वे मानहानि के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज कराएंगे।

समाजसेवक बसंत अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि किसी की निजी जमीन पर जबरन बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। यदि निस्तारी या रास्ते की जरूरत होती है तो आसपास के किसानों को सूचना देकर, उनकी सहमति से ही रास्ता बनाया जाता है। उन पर जमीन कब्जाने के लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत और निराधार हैं। जिस व्यक्ति को वे जानते तक नहीं, उसे लेकर आरोप लगाए गए, इसलिए पत्रकारवार्ता में उसे सामने लाया गया।

उन्होंने बताया कि, थान खम्हारिया क्षेत्र में उनकी लगभग 100 एकड़ जमीन, दो राइस मिल हैं और वे जमीन खरीदी-बिक्री का कार्य करते हैं। इससे होने वाली आय का एक हिस्सा वे समाजसेवा, कथा आयोजन और गरीबों की सहायता में लगाते हैं। उन्होंने दावा किया कि आज तक उन्होंने किसी गरीब को परेशान नहीं किया है और उनके खिलाफ किसी भी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

एक एफआईआर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि, वह हिंदू भाइयों के अधिकारों के लिए संघर्ष के दौरान दर्ज हुई थी और उस पर उन्हें गर्व है। समाजसेवक ने अंत में कहा कि पत्रकारिता का सम्मान तभी बचेगा, जब खबर सच के साथ समाजहित में होगी, न कि अफवाहों के सहारे।

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