बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद वर्मा की सिंगल बेंच में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान लखमा की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने तर्क दिया कि यह केस वर्ष 2024 में दर्ज हुआ था, जबकि गिरफ्तारी लगभग डेढ़ साल बाद की गई, जो न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना था कि अब तक की जांच में लखमा का पक्ष ही नहीं सुना गया और केवल कुछ बयानों के आधार पर उन्हें आरोपी बना दिया गया है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि यह पूरा मामला राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कवासी लखमा को इसी साल 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उनसे दो बार पूछताछ की गई थी और सात दिन तक कस्टोडियल रिमांड पर भी रखा गया था। इसके बाद 21 जनवरी से वे न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद हैं। पिछली सुनवाई के दौरान सुरक्षा कारणों से उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के जरिए सुनियोजित तरीके से यह घोटाला किया गया। जांच में यह सामने आया कि इस घोटाले से लखमा को करीब 64 करोड़ रुपये का लाभ मिला, जिसे व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में खर्च किया गया। अब तक इस मामले में चार चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं, जिनमें तीन पूरक अभियोग पत्र भी शामिल हैं। वहीं, 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच अभी भी जारी है।




