नोएडा। देश को हिला देने वाले निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने खुली अदालत में संक्षिप्त बहस के बाद यह निर्णय लिया।
सुनवाई के दौरान CJI गवई ने टिप्पणी की कि याचिका “एक मिनट में विचार करने योग्य” है। इस टिप्पणी से कोली की रिहाई की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि निठारी कांड के अन्य 12 मामलों में वह पहले ही बरी हो चुका है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
बेंच ने कहा कि कोली को दोषी ठहराने का आधार सिर्फ एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी थी। कोर्ट ने इसे “असामान्य परिस्थिति” बताया, क्योंकि बाकी मामलों में सबूतों की कमी के चलते उसे बरी किया जा चुका है। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
मामला क्या है
यह क्यूरेटिव पिटीशन उस केस से जुड़ी है जिसमें कोली को 15 वर्षीय लड़की के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने 2007 में उसे मौत की सजा दी थी, जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2015 में दया याचिका पर देरी के आधार पर सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
निठारी कांड की पृष्ठभूमि
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे से आठ बच्चों के कंकाल मिले थे। जांच में सामने आया कि कोली और पंढेर ने मिलकर कई बच्चों का अपहरण, बलात्कार और हत्या की थी। कोली को कुल 16 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी।
लेकिन अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते 12 मामलों में कोली और दो में पंढेर को बरी कर दिया। सीबीआई और पीड़ित परिवारों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे शीर्ष अदालत ने 30 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया।
अब कोली की आखिरी क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला आने वाला है। यदि कोर्ट इसे स्वीकार कर लेता है, तो कोली पूरी तरह रिहा हो सकता है।




