रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने आज राजधानी रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून की 20वीं वर्षगांठ और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आरटीआई कानून आम जनता को शासन-प्रशासन की जानकारी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। 12 अक्टूबर 2005 को लागू होने के बाद इसने मनरेगा, वन अधिकार अधिनियम, शिक्षा का अधिकार और भूमि अधिग्रहण कानून जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनों को लागू करने में मदद की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में आरटीआई को कमजोर किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण सूचनाओं को ‘निजी’ बताकर जनता से छिपाया जा रहा है। डबल इंजन की सरकार सच को छुपाने का प्रयास कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश में अब एजेंसियां निष्पक्ष नहीं रही। अब फैसले पहले तय होते हैं, अदालत में सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। छत्तीसगढ़ में एजेंसियां झूठे साक्ष्य गढ़ रही हैं, जिससे न्याय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बघेल ने कोयला घोटाले का उदाहरण देते हुए बताया कि कलमबंद बयान, जो न्यायाधीश के सामने खोले जाने चाहिए थे, उन्हें पहले ही सरकारी अधिकारियों ने खोल लिया। जब यह दस्तावेज मीडिया तक पहुँचा, उसमें अलग-अलग फॉन्ट पाए गए। 25 पन्नों का बयान दो दिनों में कैसे दर्ज हो गया?
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा शासन में पारदर्शिता केवल भाषणों तक सीमित है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने केंद्र सरकार से आरटीआई कानून को सशक्त बनाने और एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।




