CAG रिपोर्ट का सनसनीखेज खुलासा: स्काई वॉक बना बेवजह खर्च का प्रतीक, बिजली और कौशल विकास योजनाओं में गड़बड़ियों की पोल खुली

CAG रिपोर्ट का सनसनीखेज खुलासा: स्काई वॉक बना बेवजह खर्च का प्रतीक

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में राज्य सरकार की कई योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं और फिजूलखर्ची की ओर इशारा किया गया है। राजधानी रायपुर में बहुचर्चित स्काई वॉक प्रोजेक्ट से लेकर विद्युत वितरण प्रणाली और कौशल विकास योजनाओं तक, CAG की रिपोर्ट ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं।

बिना स्वीकृति और तैयारी के शुरू हुआ स्काई वॉक, अधूरी रह गई परियोजना
रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर में स्काई वॉक परियोजना की शुरुआत जल्दबाजी में की गई, जबकि उसके लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृतियाँ तक प्राप्त नहीं की गई थीं। निर्माण कार्य के लिए टेंडर उस समय जारी किया गया जब कंसल्टेंट द्वारा प्रोजेक्ट की शुरुआती प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी। इससे न केवल काम में देरी हुई, बल्कि बाद में किए गए डिज़ाइन परिवर्तनों के कारण लागत में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई। नतीजतन, यह परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है और सरकार के करोड़ों रुपये व्यर्थ हो गए हैं। CAG ने इस पूरे प्रकरण को फिजूलखर्ची का उदाहरण बताया है।

बिजली विभाग को राजस्व में हजारों करोड़ का नुकसान
CAG रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच उपभोक्ताओं को ऊर्जा वितरण के दौरान 9283.38 मिलियन यूनिट (MU) बिजली का नुकसान हुआ, जिससे कंपनी को 2,157.15 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नहीं मिल सका।

खराब मीटरों को समय पर न बदलने से 1353.60 करोड़ MU बिजली की हानि हुई। इसके अलावा, 2.65 करोड़ रुपये की कम बिलिंग कर उपभोक्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। सब्सिडी की प्रतिपूर्ति नहीं मिलने से कंपनी पर 2,163.43 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। अन्य तकनीकी और लेखा गड़बड़ियों से कंपनी को 15.74 करोड़ का और नुकसान हुआ। मार्च 2022 तक 301.83 करोड़ रुपये की राशि का भी कोई समाधान नहीं हो सका।

कौशल विकास योजनाओं में भी विफलता, युवाओं को नहीं मिला रोजगार
राज्य सरकार ने वर्ष 2022 तक 1.25 करोड़ कार्यशील युवाओं को प्रमाणित कुशल तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था। लेकिन वर्ष 2014 से 2023 के बीच केवल 7,27,039 युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया, जिनमें से 4,70,302 (महज 65%) को ही प्रमाणपत्र मिल सके।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 17,504 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था, परंतु परीक्षा पास करने वाले युवाओं की संख्या सिर्फ 8,481 रही, जो लक्ष्य का 48 प्रतिशत है। इन सफल उम्मीदवारों में से भी 3,312 युवाओं को रोजगार नहीं मिल सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं दिए जाने से युवाओं को रोजगार के अवसरों में भारी नुकसान उठाना पड़ा।

प्रशिक्षण व रखरखाव मद की राशि खर्च नहीं कर सके कलेक्टर
CAG ने यह भी पाया कि वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच ज़िला कलेक्टरों को मरम्मत, सामग्री आपूर्ति और उपकरणों की खरीद के लिए जो 1,358.53 लाख रुपये की निधि मिली थी, उसका उपयोग नहीं किया गया। यह राशि प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में शासन को लौटा दी गई, जिससे योजनाओं का लाभ ज़मीन पर नहीं पहुंच सका।

अरपा भैंसाझार परियोजना पर भी सवाल
रिपोर्ट में अरपा भैंसाझार परियोजना को लेकर भी गंभीर टिप्पणियाँ की गई हैं। इसके मुताबिक, इस परियोजना का काम वन एवं पर्यावरण स्वीकृति, अंतरराज्यीय मंजूरी और केंद्रीय जल आयोग से DPR की स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही शुरू कर दिया गया। इससे परियोजना की लागत और कार्य दायरे में कई बार बदलाव करना पड़ा।

CAG रिपोर्ट बनी सरकार की जवाबदेही की कसौटी
CAG की यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ सरकार के विभिन्न विभागों की कार्यशैली, योजना प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन पर गहरे सवाल खड़े करती है। विपक्ष पहले ही इन मुद्दों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुका है और अब इस रिपोर्ट के आने के बाद सियासी हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

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