भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में खनिज और वन विभाग की कथित मिलीभगत से अवैध खनन और पर्यावरण दोहन का बड़ा मामला उजागर हुआ है। मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात प्रा. लि. रायपुर पर हजारों वृक्षों की अवैध कटाई, सेफ्टी जोन से छेड़छाड़, नाले के विलुप्त होने, फर्जी दस्तावेजों और खनन नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले पर शिवसेना के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने 16 बिंदुओं में अनियमितताओं को गिनाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बिना अनुमति काट दिए 5 हजार से अधिक वृक्ष
मिश्रा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम कच्चे आरीडोंगरी (वन कक्ष क्रमांक 608) में कंपनी को कुल 138.96 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई थी। यहां 11,765 वृक्षों की कटाई योजना स्वीकृत हुई थी, जिसमें 6,070 वृक्षों को विधिवत काटा गया। लेकिन शेष 5,695 वृक्षों में से 4,983 वृक्ष कंपनी ने बिना अनुमति अवैध रूप से काट डाले। मौके पर आज एक भी वृक्ष मौजूद नहीं है, जबकि विभागीय अभिलेखों में उन्हें अब भी दर्ज किया जा रहा है।
सेफ्टी जोन हटाकर बनाई सड़कें और प्लांटेशन कागजों में
शिवसेना नेता ने आरोप लगाया कि कंपनी ने खनन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा जोन को मनमाने ढंग से हटा दिया और उसे राजस्व क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया। सेफ्टी जोन में पौधारोपण का दावा भी सिर्फ कागजों में दिखाया गया है। मौके पर पौधे मृत या गायब पाए गए। यही नहीं, कंपनी ने खनन मार्गों में बदलाव कर बिना अनुमति सड़कें बनाई, यहां तक कि वनमार्ग को बदलकर फोरलेन सड़क और कंक्रीट मार्ग भी तैयार कर लिया।
नाले का विलुप्त होना और पर्यावरण को नुकसान
मिश्रा ने आगे कहा कि खनन क्षेत्र में मौजूद 12 मासी नाला, जो पर्रेकोड़ो से डौण्डी तक नदी के रूप में बहता था, कंपनी की गतिविधियों से पूरी तरह विलुप्त हो गया है। वेस्ट मटेरियल गिरने से आसपास के जंगल और पेड़ों को भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर वेस्ट मटेरियल के ढेर पर अवैध निर्माण भी किया गया है।
नियमों की धज्जियां – खुद जारी कर रहे परिवहन अनुमति पत्र
उन्होंने बताया कि कंपनी 24 घंटे खनन और परिवहन कर रही है तथा रात में खुद ही परिवहन अनुमति पत्र (टीपी) जारी कर रही है। जबकि भारतीय वन अधिनियम 1927 और छत्तीसगढ़ परिवहन नियम 2001 के अनुसार सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट से नीलाम लौह अयस्क भी दबा दिया
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीलाम किए गए जब्त लौह अयस्क को कंपनी ने माइन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए दबा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है।
कार्रवाई की मांग
मिश्रा ने कहा कि इतने गंभीर उल्लंघनों के बावजूद वन और खनिज विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। उन्होंने दस्तावेज़ों, नक्शों और स्थल निरीक्षण के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।




